नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जलगांव जिले के वाघूर डैम से खेतों तक पानी पहुंचाने की उप योजना का काम हैदराबाद की GVPR कंपनी को दिया गया है। महाराष्ट्र के ठेकेदारों का एक लाख करोड़ रुपया PWD पर बकाया है। दक्षिण भारत की कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सरकार महाराष्ट्र की तिज़ोरी से धंधा क्यों दे रही है ? अभी तो बताया जा रहा है कि कई बीजेपी सांसद साउथ के राज्यों में लाखों करोड़ रुपयों के प्रोजेक्ट्स की ठेकेदारी खुद कर रहे हैं। 2011 में कांग्रेस की UPA सरकार ने वाघूर लिफ्ट इरिगेशन योजना के लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर किए। यह योजना पूरी होने के लिए 13 साल लग गए।

इसके दूसरे फेस में 2000 किसानों की तंजीमे बनाकर अकेले जामनेर ब्लॉक में 3830 कृषि तालाबों का निर्माण कराया जाना है। जिलाधिकारी आयुष प्रसाद को इस योजना का मार्केटिंग करने के लिए मैदान में उतारा गया है। गिरीश महाजन के निर्वाचन क्षेत्र में चार जिला परिषद गुट ऐसे हैं जिनका सिंचाई स्तर बीते तीस साल में 1% भी नहीं बढ़ा है। वाघारी – बेटावद , शहापुर – देवलगांव , शेंदुर्णी – नाचनखेड़ा , लोहारा के 100 से अधिक गांवो के किसान पानी के अभाव से पारंपरिक खेती करने को विवश है। वाघूर डैम के तालाबों का लाभ चंद अमीर किसानो को होने वाला है।
कारखानों का अभाव कृषि उत्पाद को कचरा भाव: तीस साल में जामनेर और मोदी जी के दस साल में जलगांव जिले में एक भी बड़ा कारखाना नहीं लगाया जा सका। निजी जिनिंग मिल्स की सेठ लॉबी को खुश रखने के लिए सरकारी टेक्सटाइल पार्क कैंसिल कर दिया गया। महंगाई के कारण किसानों को खेती करना दुश्वार हो गया है। किसानों की उपज को कीमत नहीं मिल पा रही है, पढ़े लिखे बेरोजगार बच्चों को धर्म रक्षा के काम में लिया जा रहा है।
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