रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आज इदुलफित्र का दिन है, सुबह से ही बच्चे बड़े सभी ईद की नामाज़ अदा करने के लिए ईदगाह पर पहुंचे, ईदगाह पर आलिम सादिक साहब ने अपनी तकरीर में फरमाया कि अल्लाह ने हमें ईमान वाला बनाया है। ईमान का तकाजा है कि हमारा ईमान मजबूत रहे और पंजगाना नमाज का एहतमाम हो इल्म के साथ जिक्र हो इकराम मूसली के तहत हर एक के साथ इकराम मुस्लिम हो। इस तकरीर के साथ ईद की नमाज़ अदा करवाई गई व मुल्क में अमन चैन खुशहाली की दुआं मांगी गई मौलाना ने खुत्बा सुनाया व सभी ने खामोशी के साथ खुत्बा सुकुन से सुना उसके बाद सभी ने एक दुसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
आलमे अरवाह में जो वादा लिया उस वादा वफाई को करना ही बंदगी है
झबुआ मरकज मस्जिद के मुफ्ती सलीम साहब ने खत्म कुरआन की दुआ में अपने बयान में फरमाया की
मौलाना ने आगे फारमाया की हमे इत्तफाक व इत्तहाद के साथ रहना तुम एक जिस्म की तरह हो जैसे जिस्म का कोई हिस्सा माउफ हो जाता है तो जिस्म के सारे आजा उसका साथ देते है।
आगे फरमाया ईद के दिन ईदगाह पर इनाम (तोहफ़ा) भी उन्ही को मिलता है जो रमजान में रमजान का हक अदा करते है जैसे रोजे का रखना, तरावीह का पड़ना, कुराने पाक का पड़ना खुदा की इबादत करना ये सारी चीजें पूरे महीने करने के बाद जब ये ईदगाह पर जाकर दुआ मांगते है तो खुदा ऐसी बेशुमार नेमते मयस्सर फरमाता है।
खुदा भी अपने बंदे से खुश होकर ईदगाह पर इसके द्वारा मांगी गई दुआ कुबूल फरमाता है। जब वे ईदगाह से लौटते है तो रब उनसे राजी हो चुका होता है आलमे अरवाह में खुदा ने हमसे कहा क्या तुम मेरी ही ईबादत करोगे मेरे हुक्म बजा लाओगे तो हमने वादा किया कि जी रब्बुल आलमीन हम तेरी ही इबादत करेगे ओर तुझ ही को अपना रब मानेंगे तेरे हुक्म को बजा लाएँगे ।
ओर फिर दुआ फरमाई
हुजूर सल्ल. ने मेम्बर के तीनों दहलीज़ पर वइद के तौर पर आमीन कही
हाफ़िज़ मोहसिन पटेल सहाब ने भी अपने बयान में कहा की आप सल्ल. ने इर्शाद फर्माया उस वक्त जिब्रील अलैहिस्सलाम मेरे सामने आये थे (जब पहले दर्जे पर मैंने क़दम रखा, तो) उन्होंने कहा की हलाक होजियो वह शख्स, जिसने रमजान का मुबारक महीना पाया, फिर भी उसकी मग्फ़िरत न हुई मैंने कहा आमीन, फिर जब मैं दूसरे दर्जे पर चढ़ा तो उन्होंने कहा, हलाक होजियो वह शख्स जिस के सामने आपका जिक्र मुबारक हो और वह दरूद न भेजे। मैंने कहा आमीन, जब मैं तीसरे दर्जे पर चढ़ा तो उन्होंने कहा हलाक हो वह शख्स जिसके सामने उसके वालिदैन या उनमें से कोई एक बुढ़ापे को पावे और वे उस को जन्नत में दाखिल न कराएं। मैंने कहा, आमीन ।
जुमतुल बिदाअ पर मौलवी सलमान सहाब ने कहा
हाफिज रिजवान सहाब ने कहा- कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इर्शाद है कि जब ईमान वाला दुआ करता है, बशर्ते कि कृता-ए-रहमी% या किसी गुनाह की दुआ न करे तो हक़ तआला शानुहू के यहां से तीन चीजों में से एक चीज जरूर मिलती है। या खुद वहीं चीज मिलती है जिसकी दुआ की या उसके बदले में कोई बुराई मुसीबत उससे हटा दी जाती है या आखरित में उसी क़दर सवाब उसके हिस्से में लगा दिया जाता है।
की हुजूर सल्ल० का इर्शाद है कि तीन आदमियों की दुआ रद्द नहीं होती। एक रोजेदार की, इफ्तार के वक्त दूसरे आदिल बादशाह की दुआ, तीसरे मजलूम की, जिस को हक़ तआला शानहू बादलों से ऊपर उठा लेते हैं और आसमान के दरवाजे उसके लिए खोल दिए जाते हैं, और इर्शाद होता है की मैं तेरी जरूर मदद करूंगा, गो (किसी मसलहत से) कुछ देर हो जाए।
ईदगाह पर गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी व कब्रस्तान में जाकर मरहूमो के लिए दुआएं खैर कि गई।
ईद की नामाज़ के बाद ईदगाह पर व शहर में हिन्दू मुस्लिम ने आपस मे एक दूसरे को गले लगाया ओर ईद की मुबारकबाद दी सोशल मीडिया पर भी ईद की मुबारकबाद देने का सिलसिला जारी है खुसूसन मुस्लिम समाज की जानिब से पूरे मुल्क को ईद की मुबारकबाद दी गई ।
मरहूमों के लिए इसाले सवाब पहुंचाया गया। ईद की नमाज के बाद समाज जन ने कब्रस्तान पहुंचकर वहां अपने मरहुमो को इसाले पहुंचाकर उनके हक में भी दुआएं खैर कि गई। मुस्लिम समाज धुम धाम से मना रहा है ईदुल फितर मिठी ईद का त्योहार समाज के युवाओं ने शेरानी पुरा में लज्जित पकवान खिर खुरमा व सेवईयां का सामुहिक भोज का आयोजन किया सभी ने उसका लुत्फ उठाया ईद की दिली मुबारकबाद दी गई।
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